कुछ ना कहो

कुछ कहो ना तुम,
लफ़्ज़ों से आज,
ख़ामोशी तुम्हारी,
मुझसे कह रही है,
हर लफ्ज़ में इसके,
राज़ है कितने दफ़न,
मेरी आँखें उनको,
रह रह के टटोल रही हैं,
समझ गयी मैं,
जो कहना था तुमको,
संग मेरे, ना रहना है तुमको,
हम भी खामोश हैं,
दूर तुम जाओगे चाहे,
तेरी ख़ामोशी में भी,
साथ तेरा निभाएंगे,
हम दूर तलक,
तेरे ही नग्में गाएंगे,
समझ सके तो समझ लेना,
ख़ामोश रहकर ही,
हम अपनी दास्ताँ सुनाएंगे..

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