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हंगामा जो ये बरपा

खाने खिलाने की बात पर , हंगामा जो ये बरपा , कुछ रूठ गए हमसे , वो छूट गए जिनके , कुछ ने मोर्चा है पकड़ा ! धर्म के नाम पर , ये कैसी चल रही सियासत , भेदभाव की छोटी सोच ने , है इंसानियत को जकड़ा !

कुछ ना कहो

कुछ कहो ना तुम , लफ़्ज़ों से आज , ख़ामोशी तुम्हारी , मुझसे कह रही है , हर लफ्ज़ में इसके , राज़ है कितने दफ़न , मेरी आँखें उनको , रह रह के टटोल रही हैं , समझ गयी मैं , जो कहना था तुमको , संग मेरे , ना रहना है तुमको , हम भी खामोश हैं , दूर तुम जाओगे चाहे , तेरी ख़ामोशी में भी , साथ तेरा निभाएंगे , हम दूर तलक , तेरे ही नग्में गाएंगे , समझ सके तो समझ लेना , ख़ामोश रहकर ही , हम अपनी दास्ताँ सुनाएंगे ..

पहचाने रास्ते, अनजाने लोग

सैर पर निकले थे , दूरी पर कुछ , अपने मिले , कुछ अनजान चेहरे , फ़र्क तो था पर , अपनों ने अनदेखा किया , अनजाने यूहीं मुस्कुरा दिए , फिर बात चली , कुछ पहचान बढ़ी , लेकिन फिर हम रुक लिए , ग़र यूँ ही चलते चले , कल वो भी अपने बन जाएंगे , फिर वो भी नज़रें चुराएँगे , हम संभल लिए , और चल दिए , यूँ हीं अनजान बनकर , दिल में अरमान लिए , की शायद कल की शाम , वो फिर हमसे टकराएंगे , कुछ बात आगे बढ़ाएंगे , दिल में अरमान लिए ... बस .. हम चल दिए ..!

जुस्तजू ये कैसी

तुम्हें पाने की जुस्तजू में , डर है की कहीं पाकर तुम्हें , महकते अहसास को खो ना दूँ , कहीं रोज़ मिलने की चाहत को , कुछ महीनो में पिरो ना दूँ , कश्मकश ये कैसी हर वक़्त , सता रही यूँ मुझको , कहीं हाँ - ना के सिलसिलों में , बेवज़ह दिल की क़सक को पनाह ना दूँ ..

क़ीमत

कुछ मांगे मिल जाती हैं , कुछ खोकर लौट आती हैं , कुछ कोशिश से पा लेते हैं , पर कुछ चीज़ें ऐसी भी हैं , जो ज़िन्दगी में कमाई जाती हैं , पैसों से चाहे तुलती हो दुनिया , इज़्ज़त कमानी पड़ती है , झूठे फ़रेब में डूबी हो दुनिया , नहीं सच को झुठला सकती है , विश्वास , निष्ठा , सच , और प्यार , कमाने में सालों लगते हैं , टूटने में पल भर ही सही , जो कमा गया , वो जी गया , वरना बिकने वालों की , कमी कहाँ है दुनिया में ...