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इज़हार-ऐ-ख़्याल

सवाल भी हैं , जवाब भी , हर बात का हिसाब भी , सुनाने को बहुत से किस्से , पर तू नहीं जो मेरे हिस्से , खामोश अब जज़्बात हैं , खुश्क से मिजाज़ हैं , गिला नहीं , शिक़वा भी नहीं , उम्मीद बाकी है मगर , मिलेंगे शब्द इन्हें भी , इक रोज़ कभी जब तुम पढोगे , दिल की बातें , दिल की ज़ुबानी   

सफ़र

नाउम्मीदी से उम्मीद का , सफर बहुत लम्बा है... उलझा सा , कभी सुलझा भी , ख्वाब के पंख कभी बुनता भी , हो सकने से.... ना हो सकने का , सफर बहुत लम्बा है... ज़िन्दगी यूँ तो गुलज़ार है , ना किसी चीज़ की दरकार है , मुकम्मल होकर भी जो हो ना सके पूरा , सब पाने में ..पर भी... उस   " काश" का , सफर बहुत लम्बा है...