इज़हार-ऐ-ख़्याल
सवाल भी हैं , जवाब भी , हर बात का हिसाब भी , सुनाने को बहुत से किस्से , पर तू नहीं जो मेरे हिस्से , खामोश अब जज़्बात हैं , खुश्क से मिजाज़ हैं , गिला नहीं , शिक़वा भी नहीं , उम्मीद बाकी है मगर , मिलेंगे शब्द इन्हें भी , इक रोज़ कभी जब तुम पढोगे , दिल की बातें , दिल की ज़ुबानी