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ख़लिश

चाहने और पाने के दरमियां फ़ासला लम्बा है   रास्ता है , मंज़िल भी , पर अनदेखी डोरियां हैं   खींचती पीछे तुम्हें ,  ख्वाहिशों से हक़ीक़त के दरमियां फ़ासला लम्बा है   यादें हैं बस दरमियां   जो साथ हैं , हक़ीक़त की तरह   उम्मीद है , ख्वाहिश की तरह ....