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दीन भी बना रहे, हर धरा भी खड़ी रहे

 मुमकिन है हर दीन भी बना रहे, विचारधारा भी खड़ी रहे, इतिहास गवाह है,  'सुलह-ए-कुल', कोशिश थी कि बदले  सूरत हिंदुस्तान की।

मैं नदी, तुम पत्थर

 मैं नदी होना चाहती हूँ, जैसे तुम पत्थर, बहती हुई जब टकराऊँ तुमसे, तुम घुलते रहो मुझमें, हर कण, हर क्षण।