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Showing posts from August, 2015

ग़र मिले मौका

ग़र मिले एक मौका , तुझसे मांगूं बस इतना , कुछ कर ऐसा करिश्मा , एक ही धर्म हो सबका , एक ही जाति के लोग , ना हो भेदभाव कोई , मिलकर रहे हर कोई , इंसानियत का पाठ पढ़ें , मोहब्बत जिसका सार हो , ना रिश्तों में तकरार हो , छोटे बड़े की ना बात हो , हर ओर खुशियों का अंबार हो , ना आतंकवाद का हाहाकार हो , हर तरफ भाईचारे की बात हो , ये छोटी सी ख़्वाहिश है , देखूं ऐसा भी जहां कोई , ग़र मिले एक मौका , तुझसे मांगूं बस इतना ..

भीड़ में गुम इंसान

वो दौड़ता है रोज़ , मंज़िल की ओर , ढूंढने अपना रास्ता , फिर भीड़ में खोकर .. फिर होता है निराश , नाकामी पर अपनी , खोजता है खुदको , फिर भीड़ में खोकर .. उम्मीद फिर बनती है , सपने फिर सजते हैं , नयी राह पकड़ता है , फिर भीड़ में खोकर .. उलझनों के जाल में , भीड़ के जंजाल में , फंस गया है इंसान ऐसे , बंद पिंजरे में पंक्षी जैसे .. हर कोई आज .. इस दौड़ का हिस्सा है , कभी ना ख़त्म हो ... ये वो किस्सा है !

आदत

कुछ ख़ास है उसकी , शक़्सियत में वो आदत , दूर जितना जाओ , वो अपना बना लेती है , हर मुलाक़ात में , हाथों में हाथ रखकर , मुझको समझाना , भरोसा दिलाना , प्यार से मनाना , मुझे देख मुस्काना , हाँ में हाँ मिलाना , हर शिकवे भूल जाना , हर बात पे हँसाना , कभी बातें बनाना , कभी घूमना घुमाना , उसकी आदत ज़रा सी , है मेरी राहत ज़रा सी ..

कल नहीं 'आज'

सोचा है आज , कुछ करने का कल , कल सोचूंगी , अगले कल कुछ करने का , यूँ कल कल के चक्कर में , कितने आज खो गए , कितने मौके छूट गए , अब और नहीं रुकना , बस आगे है बढ़ना , आज , अभी और अब से , है मेरी नयी शुरुवात , नए रास्तों पे चलकर , नई मंज़िलों को पाएंगे , वक़्त को पीछे छोड़कर , नया इतिहास रचाएंगे ..

हसरतें..

पास नहीं पर अहसास काफी है , तेरी यादों का पहरा काफी है , मिलोगे जल्द , कहा था तुमने , उस वादे का इंतज़ार काफी है .. हर पल देखने की हसरत है , तुम्हें पाने की चाहत भी , काश ! ये ख़्वाब हक़ीक़त होते , वरना अधूरा ही सही ... ख़्वाब काफी है ..