तू सबका है, मैं तेरी ..

बार बार हर बार,
लगता यूँ मुझे,
है कहना जो तुझे,
वो कह दूँ इसबार,
गलतियां हैं हज़ारों,
हुई जो कई बार,
माफ़ी किसकी मांगूं,
कहाँ से करूँ शुरुवात,
हर कदम पर तूने,
मुश्किलों से बचाया,
पर अनजाने में मैंने,
गलतियों को दोहराया,
नहीं पता तू है के नहीं,
पर तेरी नज़र में सब हैं,
सबका है तू, तेरे हैं सब,
पुकारते सब अलग अलग,
तू ही मेरा राम है,
तू ही यीशु, अल्लाह है,
वाहेगुरु में भी तू ही है,
तू हर एक में बसता है,
तेरे रंग में रंग जाऊं,
रहमत ऐसी बक्श दे,
'यार' की कमली बन जाऊं,
मोहब्बत ऐसी बक्श दे...

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