हम, तुम ... तुम, हम
तुम
मुझ में,
मैं तुझ
में,
खो
जाएं इस
क़दर,
चुरा
लें कुछ
पल,
इस
सयानी भीड़
में,
ना
होश हो
दुनिया की,
ना
फिक्र हो
बातों की,
बस
खामोशी हो
हर तरफ,
और
बात हो
जज़्बात की,
ख़ूबसूरत अहसास
की,
जो
मिटा दे
सब दूरियां,
कुछ
तुम कहो,
कुछ मैं
सुनु,
वक़्त
ठहर जाये
यहाँ,
तुम
मुझ में,
मैं तुझ
में,
खो
जाएं इस
क़दर,
चुरा
लें कुछ
पल,
इस
सयानी भीड़
में..
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