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नया साल मुबारक!

हर साल , हर दिन हो मुबारक , ग़र ना हो रिश्तों में मिलावट , ना आए आदर्शों में गिरावट , हर मुल्क , हर मज़हब का हो , इंसानियत ही मक़सद !

कश्मकश

ना आज का पता है , ना कल की खबर है , जो कर गया बीते पल , आज उसी का असर है , ना कोस अब किसी को , थोड़ी बंदगी तू कर ले , एक ज़िन्दगी मिली है , किसी के नाम कर दे !

हम युवा हैं आज के, बदलाव हम ही लाएंगे

हम युवा हैं आज के , बदलाव हम ही लाएंगे ! ना ला सके जो नेता हमारे , वो लोकनीतियां बनाएंगे , जहाँ सभी को मिले अधिकार , सभी का हो सम्मान , आगे बढ़े सभी साथ - साथ , ऐसी परिस्तिथियाँ बनाएंगे , हम युवा हैं आज के , बदलाव हम ही लाएंगे ! भ्रष्ट , झूठे , फरेबियों से , देश को मुक्ति दिलाएंगे , चाहे राजनीति हो या , हो कोई भी क्षेत्र उसमें , मेहनत और ईमानदारी से , बुलंदियों पर ले जायेंगे , हम युवा हैं आज के , बदलाव हम ही लाएंगे ! छोड़कर समाज की रीतियों को , हटकर पुरानी सोच से , नई सोच को अपनाएंगे , हम आज हैं , कल सवारेंगे , नए भारत को रचकर दिखाएंगे , हम युवा हैं आज के , बदलाव हम ही लाएंगे !

ये दुनिया बदनाम है

जो बनाई खुदा ने , ये नहीं वो दुनिया , यहाँ इंसानों का जंजाल है , साज़िशों की भरमार है , हर चेहरे पे नक़ाब है , एक दूजे के गुनहगार है , नफ़रत , झूठ , धोखा हर तरफ , भिन धर्मों का मायाजाल है , आतंक की हैवानियत के आगे , आज इंसानियत शर्मसार है !

वो गुज़रा ज़माना

पार्क खेल का ठिकाना था , दिल बारिश का दिवाना था ! नींद वक़्त से आती थी , बुज़ुर्गों की कहानियाँ जो सुलाती थी ! ना फिक्र थी किसी चीज़ की , हर मौसम लगता सुहाना था ! बात ये बीते कल की है , जो गुज़रा ज़माना था ! वही असली खज़ाना था , जो   बचपन का फ़साना था !

दिल लगी

मैं हासिल कर लूँ दुनिया जहां , तू ज़रिया तो बन , मैं झूमूँ सरगम की तरह , तू साज़ तो बन , हर मुश्किल हो जाएगी आसां , तू अंजाम तो बन , हर शक़्स से लड़ जाऊं मैं , तू आवाज़ तो बन , ये ज़िन्दगी बन जाये गुलिस्तां , तू अहसास तो बन !

तेरे मेरे दरमियां

ना रह सके जो साथ हमेशा , यादों में रहना तुम , ख्यालों में कहना तुम , कुछ तो रखना वास्ता , चाहे फिर हो फ़ासला , तेरे मेरे दरमियां , कोई बने दास्तां , तेरे मेरे दरमियां ..

चलना ही अपना काम है

बदलाव की एक चाह में , जो लहर सी है उठ रही , उस उम्मीद की डगर पर , चलना ही अपना काम है ! ग़र बदल सके उस सोच को , जो मुल्क़ को खोखला कर रही , हौंसला और हिम्मत , ऐसे रख , चलना ही अपना काम है ! ना सोच अब बदलाव लाने आएगा कोई और , वो तू ही है जो थामेगा , इस देश की बागडोर ! लाख खामियां तो होंगी ज़रूर तूने देखीं , एक कदम तो बढ़ा , तो सुधार की ओर ! हाथों में संजोये है , इस देश की तकदीर को , एक वोट तेरी बदल सकती है , देश की तस्वीर को ! बदलाव समय है मांगता , नहीं ये बात घड़ियों की , मन में ठान ले जो ग़र , तू वक़्त का रुख मोड़ दे ! तू हिम्मत तो रख , बदलाव की , नई सोच से अलगाव की , बूँद - बूँद से सागर है भरता , इस सोच से नव - निर्माण की ! बदलाव की एक चाह में , जो लहर सी है उठ रही , उस उम्मीद की डगर पर , चलना ही अपना काम है !

सब रावण तो राम कौन?

ये कैसी विडंबना है कलयुग की , रावण तो जलता है हर साल , पर बुराई नहीं मरती हर साल , जो सदियों पहले कथाओं में , श्री राम ने रावण को हराया था , सत्य का परचम लहराया था , रामायण का इतिहास बनाया था , हारा रावण नहीं , बुराई थी , जीते राम नहीं , अच्छाई थी , कलयुग की रामायण कुछ और है , जलता है पुतला , पर बुराई नहीं जलती , झूठ की दुनिया में , सच्चाई नहीं टिकती , हर कोई मनाता है त्योहार की खुशियाँ , सच को मानना पर लगता मुश्किल , ये विडंबना ही तो है कलयुग की , कहने को त्यौहार बड़ा , मन में सबके रावण बसा , अहंकार में चूर हर कोई , मोह बंधन से परे ना कोई , झाँक ले जो मन में एक बार , करके बुराइयों का परित्याग , जीत ले हर सच की लड़ाई , दशहरा है उसी का , दिवाली भी उसी की ..!!