मुट्ठी भर आसमां
दो पल की ये ज़िन्दगी , पर ख़्वाब बहुत सारे , वक़्त भी है कम , पर काम ढेर सारे .. कश्मकश ये कैसी , है सोच में हर कोई , क्या करे .. क्या ना करें , भाग रहा हर कोई .. कोई मंज़िल के करीब है , कोई ढूंढ़ता अपने महल , कोई भटक रहा दर बदर , करने अपनी पहली पहल .. तलाश है ' पहचान ' की , हर शक़्स को अपने नाम की , मुट्ठी में करले आसमां , हसरत ये , हर इंसान की ..