बदले वक़्त की तस्वीर

नियम है नियति का,
वक़्त को तो बदलना है,
पर इंसान भी बदल गए,
संग रिश्तों के मायने भी..

नेकी के रास्ते भटक गए,
सोच और इरादे भी,
ज़रूरतों के साथी बन गए,
बदली जीने की तहज़ीब भी..

आँखों से हो बातें,
तो समझना आसान है,
लफ़्ज़ों की कमी नहीं पर,
बदले हर बात के मतलब भी..

कहें किससे, सुनाएँ किसे,
इस बदली दुनिया के रंग,
यहाँ बदले इंसानों के,
बदले खुदा भी ..

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