ख़्वाब, हक़ीक़त और ज़िन्दगी
हर
ख़्वाब को
हक़ीक़त नहीं
मिलती,
हर
हक़ीक़त ख़्वाब
से नहीं
मिलती,
ज़िन्दगी फिर
भी खूबसूरत है
खुद में,
ये
बेवजह हर
किसी को
नहीं मिलती
..
मिली
है जो,
गुनगुना लो
इसे,
सतरंगी ख़्वाबों से
सजा लो
इसे,
पूरे
होंगे वो,
मुस्कुरा लो
ज़रा,
ज़िन्दगी को
खुद में
बसा लो
ज़रा..
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