मन की बात
ना
बोल हैं
कहने को,
ना
शब्द हैं
लिखने को,
पर
कुछ भार
सा है
अंदर,
चुप
है, खामोश
है,
दब
रहा अंदर
ही अंदर,
पर
जीने की
आस है,
प्यार
का अहसास
है,
शायद
वक़्त कुछ
ख़राब है,
या
मौसम का
मिजाज़ है,
ये
शाम ढलने
को है,
मुरझाई उम्मीदें भी,
नए
सवेरे का
इंतज़ार,
नयी
उमंगों की
बौछार,
बदलेगा ये
वक़्त अब,
कहता
ये दिल
बार बार,
छटेंगे निराशा के
बादल,
खुलेगा आशाओं
का क्षितिज,
भोर
की सुनहरी किरण,
करेगी
नए सफ़र
का आगाज़
!
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