वो गुज़रा ज़माना
पार्क खेल का ठिकाना था , दिल बारिश का दिवाना था ! नींद वक़्त से आती थी , बुज़ुर्गों की कहानियाँ जो सुलाती थी ! ना फिक्र थी किसी चीज़ की , हर मौसम लगता सुहाना था ! बात ये बीते कल की है , जो गुज़रा ज़माना था ! वही असली खज़ाना था , जो बचपन का फ़साना था !