चलना ही अपना काम है
बदलाव की एक चाह में, जो लहर सी है उठ रही,
उस उम्मीद की डगर पर, चलना ही अपना काम है !
ग़र बदल सके उस सोच को, जो मुल्क़ को खोखला कर रही,
हौंसला और हिम्मत, ऐसे रख, चलना ही अपना काम है !
ना सोच अब बदलाव लाने आएगा कोई और,
वो तू ही है जो थामेगा, इस देश की बागडोर !
लाख खामियां तो होंगी ज़रूर तूने देखीं,
एक कदम तो बढ़ा, तो सुधार की ओर !
हाथों में संजोये है, इस देश की तकदीर को,
एक वोट तेरी बदल सकती है, देश की तस्वीर को !
बदलाव समय है मांगता, नहीं ये बात घड़ियों की,
मन में ठान ले जो ग़र, तू वक़्त का रुख मोड़ दे !
तू हिम्मत तो रख, बदलाव की, नई सोच से अलगाव की,
बूँद-बूँद से सागर है भरता, इस सोच से नव-निर्माण की !
बदलाव की एक चाह में, जो लहर सी है उठ रही,
उस उम्मीद की डगर पर, चलना ही अपना काम है !
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