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Showing posts from June, 2015

क्या हो गुफ़्तगू...

क्या हो गुफ़्तगू , तेरे मेरे बीच , कभी मौका ना मिला , कभी दस्तूर ना मिला .. मिला भी तो , वो ना मिला , वो मिला , तो लब खामोश रहे , फ़ासलें बढ़ गए , और हम चुप रहे .. अब क्यों शिकायत करें , खुद से या तुझसे , दिल ही दिल में , बस आहें भरें .. यूँ तो मिले कई चेहरे भीड़ में , पर कोई तुझसे ना मिला .. क्या हो गुफ़्तगू , तेरे मेरे बीच , कभी मौका ना मिला , कभी दस्तूर ना मिला ..

लिखना अच्छा है

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यूँही कुछ लिखने का मन है , जज़्बातों को कहने का मन है , कहना है बस , सुनना नहीं है , दिल हल्का करने का मन है .. ब्लॉग पर लिखती हूँ जब , तो खुद से मिलती जुलती हूँ , कभी हस्ती हूँ , कभी रोती हूँ , अकेलापन बाँट लेती हूँ .. लिखना सुकून देता है , जज़्बातों को आइना भी , आज़ादी देता है कहने की भी , ख्यालों को करता क़ैद भी .. कभी किस्से , कभी कहानी , कभी सपने , कभी रवानी , मिलते हैं मुझसे रोज़ यहीं , बनकर मेरे दिल की ज़ुबानी ..

जीना इसी का नाम है ..

उलझनें हैं तो सुलझा लो , ग़म है , ज़रा मुस्कुरा लो , ज़िन्दगी जीने का नाम है , इसे हंस कर बिता लो .. छोटी सी है , पल दो पल की , अपने अंदाज़ में गुनगुनालो , ना परवाह कर , ना चिंता कोई , ज़िन्दगी मिली है , बेफिक्री से बिता लो ...

'काश' क्यों दिल में बाकी है..

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ज़िन्दगी कट भी गयी कितनी , हम आगे बढ़ भी गए इतने , पर ' काश ' क्यों दिल में बाकी है .. हर पल , हर घड़ी , हर लम्हा , ये ' काश ' क्यों मुझ पर हावी है , क्या है वो , जो दिल में छुपा कहीं , कुछ राज़ है , जो अब तक खुला नहीं .. सुनकर भी जो अनसुना ही रह गया , कहकर भी जो अनकहा ही रह गया , वो हर बार , हर बात , हर जज़्बात , मुझ में यूँ खनक रहे .. पर ' काश '...... वो ' काश ' ही रह गया ..