क्या हो गुफ़्तगू...
क्या हो गुफ़्तगू , तेरे मेरे बीच , कभी मौका ना मिला , कभी दस्तूर ना मिला .. मिला भी तो , वो ना मिला , वो मिला , तो लब खामोश रहे , फ़ासलें बढ़ गए , और हम चुप रहे .. अब क्यों शिकायत करें , खुद से या तुझसे , दिल ही दिल में , बस आहें भरें .. यूँ तो मिले कई चेहरे भीड़ में , पर कोई तुझसे ना मिला .. क्या हो गुफ़्तगू , तेरे मेरे बीच , कभी मौका ना मिला , कभी दस्तूर ना मिला ..