..जाना पहचाना वो चेहरा ..
ज़िन्दगी में हर दिन मिली, किसी न किसी को,
न जाने वो अनजान चेहरा, क्यों अपना सा लगा !
कभी बातें, कभी काम, कभी शरारतें,
हर बात में उसका ज़िक्र, क्यों पहचाना सा लगा !
मसरूफ़ियत तो पहले भी होती थी ग़र,
सोच में उसकी, मसरूफ़ रहना, क्यों अच्छा सा लगा !
सोच बैठे थे दूर ही अच्छे हैं इश्क़ विश्क़ के चककरों से,
फिर वही हँसना, गुनगुनाना, क्यों अच्छा सा लगा !
कुछ हम से कहा, कुछ हम से सुना,
ज़िन्दगी बन गया वो, फिर क्यों ये सपना सा लगा !
ज़िन्दगी में हर किसी के लिए, कोई बना है कहीं तो,
इस हक़ीक़त पर यकीन करना, अब सच्चा सा लगा !

mareez: doctor sahib, much ek bande k siva or koi dikhayi nahi data. main kya karu??
ReplyDeletedoc: is beemari ka ilaaj medical science abhi tak nahi nikaal payi bhai.
mareez: kya beemari hai yeh??
doc: Ishq !!
:) Bilkul sahi :)
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