लिखना अच्छा है














यूँही कुछ लिखने का मन है,
जज़्बातों को कहने का मन है,
कहना है बस, सुनना नहीं है,
दिल हल्का करने का मन है..

ब्लॉग पर लिखती हूँ जब,
तो खुद से मिलती जुलती हूँ,
कभी हस्ती हूँ, कभी रोती हूँ,
अकेलापन बाँट लेती हूँ..

लिखना सुकून देता है,
जज़्बातों को आइना भी,
आज़ादी देता है कहने की भी,
ख्यालों को करता क़ैद भी..

कभी किस्से, कभी कहानी,
कभी सपने, कभी रवानी,
मिलते हैं मुझसे रोज़ यहीं,
बनकर मेरे दिल की ज़ुबानी..

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