'काश' क्यों दिल में बाकी है..
ज़िन्दगी कट
भी गयी
कितनी,
हम
आगे बढ़
भी गए
इतने,
पर
'काश' क्यों
दिल में
बाकी है..
हर
पल, हर
घड़ी, हर
लम्हा,
ये
'काश' क्यों
मुझ पर
हावी है,
क्या
है वो,
जो दिल
में छुपा
कहीं,
कुछ
राज़ है,
जो अब
तक खुला
नहीं..
सुनकर
भी जो
अनसुना ही
रह गया,
कहकर
भी जो
अनकहा ही
रह गया,
वो
हर बार,
हर बात,
हर जज़्बात,
मुझ
में यूँ
खनक रहे..
पर
'काश'...... वो 'काश'
ही रह
गया..

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