सब रावण तो राम कौन?

ये कैसी विडंबना है कलयुग की,
रावण तो जलता है हर साल,
पर बुराई नहीं मरती हर साल,
जो सदियों पहले कथाओं में,
श्री राम ने रावण को हराया था,
सत्य का परचम लहराया था,
रामायण का इतिहास बनाया था,
हारा रावण नहीं, बुराई थी,
जीते राम नहीं, अच्छाई थी,
कलयुग की रामायण कुछ और है,
जलता है पुतला, पर बुराई नहीं जलती,
झूठ की दुनिया में, सच्चाई नहीं टिकती,
हर कोई मनाता है त्योहार की खुशियाँ,
सच को मानना पर लगता मुश्किल,
ये विडंबना ही तो है कलयुग की,
कहने को त्यौहार बड़ा,
मन में सबके रावण बसा,
अहंकार में चूर हर कोई,
मोह बंधन से परे ना कोई,
झाँक ले जो मन में एक बार,
करके बुराइयों का परित्याग,
जीत ले हर सच की लड़ाई,
दशहरा है उसी का, दिवाली भी उसी की..!!

Comments

Popular posts from this blog

एकांत

बाबा साहेब- महानायक