मतलब के यार
जब
तक थे
काम के,
पूछा
हर किसी
ने,
वक़्त
जो दिया
खुदको,
सब
बेगाने हो
गए..
पहले
मीठे बोल
थे,
अब
ताने हो
गए,
अपना
जो कहते
थे,
अब
पराये हो
गए..
ये
सच है
सदा से,
हर
चेहरे पर
मुखौटा है,
जो
ज़रूरत देख
बदलता है,
पर
दिल तो
आखिर बच्चा
है..
सच
को ये
मानता नहीं,
बहलाता है
खुद को
ही,
फिर
एकबार टूटने
को,
जोड़ता
है खुद
को ही..
उम्मीद...कोई
मिले ऐसा,
जो
हो मुझ
जैसा,
पिरो
सकूँ माला
में अपनी,
एक
दोस्त तुझ
जैसा..
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