कल नहीं 'आज'

सोचा है आज,
कुछ करने का कल,
कल सोचूंगी,
अगले कल कुछ करने का,
यूँ कल कल के चक्कर में,
कितने आज खो गए,
कितने मौके छूट गए,
अब और नहीं रुकना,
बस आगे है बढ़ना,
आज, अभी और अब से,
है मेरी नयी शुरुवात,
नए रास्तों पे चलकर,
नई मंज़िलों को पाएंगे,
वक़्त को पीछे छोड़कर,
नया इतिहास रचाएंगे..

Comments

Popular posts from this blog

एकांत

बाबा साहेब- महानायक