मैं नदी, तुम पत्थर

 मैं नदी होना चाहती हूँ, जैसे तुम पत्थर,

बहती हुई जब टकराऊँ तुमसे,

तुम घुलते रहो मुझमें,

हर कण, हर क्षण।

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