एक दोस्त











आज बात करने को जी चाहा,
तो सोचा खुद से बतिया लिया जाये,
मन जो भारी सा है, हल्का किया जाये,
कभी रोई, कभी हंसी, पर बातें चलती रहीं,
मन हल्का हुआ और शांत भी,
फिर सोचा.. ये कोशिश अब अक्सर की जाये,
आज वक़्त कहाँ है किसी के पास,
खुद में दोस्त को तलाश लिया जाये,
ये समझता भी है, समझाता भी,
हर मुसीबत में साहस बढ़ाता भी,
मासूम सा है और चंचल भी,
मुझमें आत्मविश्वास जगाता भी,
मुझ में ही तो है तू, पर दिखता नहीं सामने,
आवाज़ देता है अंदर से, सोचा कुछ गुनगुना लिया जाये,
ज़िन्दगी की भागती कश्मकश में, अब आसान लगता है जीना,

दोस्त जो मिला खुद में....... ‘ खुद को’ खुद में जी लिया जाये !

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