अजब ये दुनिया, गज़ब के हम
रहते
एक छत
के नीचे,
पर
आपस में
मिलते नहीं,
कमरे
में बस्ती
अब दुनिया,
एक
दूजे के
लिए वक़्त
नहीं,
साथ
बैठे, खाते
थे जो
पहले,
अब
टीवी, फेसबुक से
फुर्सत नहीं..
अब
व्हाट्सएप्प का
ज़माना है,
ये
बात करने,
समझाने का
ठिकाना है,
झगड़ते
थे कभी
वक़्त नहीं
मिलने पे
जो,
अब
'लास्ट सीन'
नया बहाना
है,
कभी
जो मिलकर
दिल करते
थे हल्का,
अब
हाल-ए-दिल भी,
स्टेटस पर
होता जताना
है..
ये
अजब गज़ब
सी दुनिया में,
इंसानो से
ज़्यादा मशीनों का
ज़माना है,
समझता
यूँ तो
हर कोई
है फिर
भी,
न
जाने नुक्सान से
क्यों दिखता
अंजाना है,
हम
जो कर
बैठे दर्द-ए-दिल
बयां उनको,
लिखते 'टू लॉन्ग मैसेज टू रीड', यार 'शार्ट फॉर्म' का
ज़माना है !
Very beautifully written and expressed! Thumbs up!
ReplyDeleteThank you :)
DeleteWell said Sonia! Relationships are getting more technical today.
ReplyDeleteThanks shelley! Yaa that's so true
DeleteBeautifully expressed Sonia.
ReplyDeleteThanks sarita :)
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