वजह ढूंढ़ती हूँ..
वजह
ढूंढ़ती हूँ
मैं,
कुछ
लिखने की,
कुछ
कहने की,
खाली
सी हूँ
अब,
कोई
भर दे
मुझे,
प्यार
के सागर
से,
हसीं
की खिलखिलाहट से,
उड़ने
के ख़्वाबों से,
जीने
के मक़सद
से,
नई
सी बनकर
फिर,
झूमूँ
हवाओं संग
मैं,
खुले
आकाश में
जैसे,
परिंदे उड़ते
हैं वैसे,
ना
रोक हो,
ना बंदिशें,
बस
तुम और
मैं,
इस
जहां भी,
उस जहां
भी..
बस.....वजह ढूंढ़ती हूँ
मैं....
bahut ache. but why so pessimistic about life ???
ReplyDeleteNot really pessimistic but sometimes when I feel such vibes, I give them words and remain at peace.
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