पहचाने रास्ते, अनजाने लोग

सैर पर निकले थे,
दूरी पर कुछ, अपने मिले,
कुछ अनजान चेहरे,
फ़र्क तो था पर,
अपनों ने अनदेखा किया,
अनजाने यूहीं मुस्कुरा दिए,
फिर बात चली, कुछ पहचान बढ़ी,
लेकिन फिर हम रुक लिए,
ग़र यूँ ही चलते चले,
कल वो भी अपने बन जाएंगे,
फिर वो भी नज़रें चुराएँगे,
हम संभल लिए, और चल दिए,
यूँ हीं अनजान बनकर,
दिल में अरमान लिए,
की शायद कल की शाम,
वो फिर हमसे टकराएंगे,
कुछ बात आगे बढ़ाएंगे,
दिल में अरमान लिए... बस..हम चल दिए..!

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