कुछ वक़्त पुराना याद आया.
बारिश
की बूंदों में,
मुस्कुराते चेहरों में,
कुछ
वक़्त पुराना याद
आया..
पार्क
की उस
सीट में,
वो
दूर दिखते
रास्तों में,
कुछ
वक़्त पुराना याद
आया..
भीड़
में गुम
जाने पर,
वो
आवाज़ सुन
जाने पर,
कुछ
वक़्त पुराना याद
आया..
फ़ोन
की घंटी
बजते ही,
उन
लम्बी मीठी
बातों में,
कुछ
वक़्त पुराना याद
आया..
कांच
की खिड़की
के उसपार,
चाँद
को फिर
निहारकर,
कुछ
वक़्त पुराना याद
आया..
अलमीरा में
पड़ी किताबों में,
हर
पन्ने को
पढ़कर,
कुछ
वक़्त पुराना याद
आया..
बचपन की यादें, जवानी के दिन,
हर वक़्त सुहाना याद आया,
कुछ वक़्त पुराना याद आया..
umda prastuti...
ReplyDeleteShukriya surender ji :)
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